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042

Ash-Shuraa 42:13 ۞ شرع لكم من الدين ما وصى به نوحا والذي اوحينا اليك وما وصينا به ابراهيم وموسى وعيسى ان اقيموا الدين ولا تتفرقوا فيه كبر على المشركين ما تدعوهم اليه الله يجتبي اليه من يشاء ويهدي اليه من ينيب ١٣

42:13
۞ شَرَعَ
لَكُم
مِّنَ
ٱلدِّينِ
مَا
وَصَّىٰ
بِهِۦ
نُوحٗا
وَٱلَّذِيٓ
أَوۡحَيۡنَآ
إِلَيۡكَ
وَمَا
وَصَّيۡنَا
بِهِۦٓ
إِبۡرَٰهِيمَ
وَمُوسَىٰ
وَعِيسَىٰٓۖ
أَنۡ
أَقِيمُواْ
ٱلدِّينَ
وَلَا
تَتَفَرَّقُواْ
فِيهِۚ
كَبُرَ
عَلَى
ٱلۡمُشۡرِكِينَ
مَا
تَدۡعُوهُمۡ
إِلَيۡهِۚ
ٱللَّهُ
يَجۡتَبِيٓ
إِلَيۡهِ
مَن
يَشَآءُ
وَيَهۡدِيٓ
إِلَيۡهِ
مَن
يُنِيبُ
١٣
उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित1 किया है, जिसका आदेश उसने नूह़ को दिया और जिसकी वह़्य हमने आपकी ओर की, तथा जिसका आदेश हमने इबराहीम तथा मूसा और ईसा को दिया, यह कि इस धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ। बहुदेववादियों पर वह बात भारी है जिसकी ओर आप उन्हें बुलाते हैं। अल्लाह जिसे चाहता है, अपने लिए चुन लेता है और अपनी ओर मार्ग उसी को दिखाता है, जो उसकी ओर लौटता है।
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Ibn Kathir (Abridged)

The Religion of the Messengers is One

Allah says to this Ummah:

شَرَعَ لَكُم مِّنَ الِدِينِ مَا وَصَّى بِهِ نُوحاً وَالَّذِى أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ

(He (Allah) has ordained for you the same religion which He ordained for Nuh, and that which We have revealed to you,) Allah mentions the first Messenger who

…

The Religion of the Messengers is One

Allah says to this Ummah:

شَرَعَ لَكُم مِّنَ الِدِينِ مَا وَصَّى بِهِ نُوحاً وَالَّذِى أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ

(He (Al

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Chapter 42, Page 484, Juz 25

10. और तुम जिस चीज़ के बारे में भी मतभेद करो, उसका निर्णय अल्लाह की ओर है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया है तथा उसी की ओर मैं लौटता हूँ। 11. (वह) आकाशों तथा धरती का रचयिता है। उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी अपनी ही जाति से जोड़े बनाए तथा पशुओं से भी जोड़े। वह तुम्हें इसमें फैलाता है। उसके जैसी कोई चीज़ नहीं और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है। 12. आकाशों तथा धरती की कुंजियाँ उसी के पास हैं। वह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग कर देता है। निःसंदेह वह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है। 13. उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित किया है, जिसका आदेश उसने नूह़ को दिया और जिसकी वह़्य हमने आपकी ओर की, तथा जिसका आदेश हमने इबराहीम तथा मूसा और ईसा को दिया, यह कि इस धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ। बहुदेववादियों पर वह बात भारी है जिसकी ओर आप उन्हें बुलाते हैं। अल्लाह जिसे चाहता है, अपने लिए चुन लेता है और अपनी ओर मार्ग उसी को दिखाता है, जो उसकी ओर लौटता है। 14. और वे लोग आपस की ज़िद के कारण इसके पश्चात् अलग-अलग हुए कि उनके पास ज्ञान आ चुका था। तथा यदि वह बात न होती जो आपके पालनहार की ओर से एक निश्चित समय के लिए पहले तय हो चुकी, तो अवश्य उनके बीच निर्णय कर दिया जाता। और निःसंदेह वे लोग जो उनके पश्चात् पुस्तक के उत्तराधिकारी बनाए गए, वे इस (क़ुरआन) के बारे में दुविधा में डालने वाले संदेह में पड़े हैं। 15. अतः आप लोगों को इसी (धर्म) की ओर बुलाएँ और (उसपर) जमें रहें, जैसाकि आपको आदेश दिया गया है और उनकी इच्छाओं का पालन न करें, तथा कह दें कि अल्लाह ने जो भी किताब उतारी है मैं उसपर ईमान लाया। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं तुम्हारे बीच न्याय करूँ। अल्लाह ही हमारा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है। हमारे लिए हमारे कर्म हैं तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। हमारे और तुम्हारे बीच कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह हम सभी को एकत्र करेगा तथा उसी की ओर लौटकर जाना है। 16. तथा जो लोग अल्लाह के (धर्म के) बारे में झगड़ते हैं, इसके पश्चात कि उसे स्वीकार कर लिया गया, उनका तर्क उनके रब के यहाँ बातिल (व्यर्थ) है, तथा उनपर बड़ा प्रकोप है और उनके लिए बुहत कड़ी यातना है। 17. अल्लाह ही है जिसने सत्य के साथ यह पुस्तक उतारी तथा तराज़ू भी, और आपको क्या चीज़ सूचित करती है शायद कि क़ियामत क़रीब हो। 18. उसे वे लोग शीघ्र माँगते हैं, जो उसपर ईमान नहीं रखते, तथा वे लोग जो उसपर विश्वास रखते हैं, वे उससे डरने वाले हैं और जानते हैं कि निःसंदेह वह सत्य है। सुनो! निःसंदेह जो लोग क़ियामत के विषय में बहस (संदेह) करते हैं, निश्चय वे बहुत दूर की गुमराही में हैं। 19. अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा दयालु है। वह जिसे चाहता है रोज़ी देता है और वही सर्वशक्तिमान, सब पर प्रभुत्वशाली है।

- Maulana Azizul Haque al-Umari

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